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Saturday, 27 December 2014

आशा

अनुकूल होती हैं
परिस्तिथियाँ भी साहस से
भंवर ये रोक नहीं सकते
तुझे उस पार जाने से
प्रवाहों की दिशाएं
खुद ब खुद बदल ही जाएँगी
उजालों की किरण
तुझे अंधेरों से बुलाएंगी
न कर भरोसा भाग्य पर
हर पल ये तेरा है
जिन्दा नहीं हैं वो
जिन्हें निराशा ने घेरा है
तपते हौसलों से और
कई पत्थर गलाने हैं
तेरे बुझने से पहले
तुझसे कई दीपक जलाने हैं
:- अनिल कुमार सिंह