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Sunday, 13 September 2015

ऐ ज़िंदगी तूँ मुस्करा

कभी तो हंस के नज़र मिला ,
ऐ ज़िंदगी तूँ मुस्करा ,
ये मुश्किलें परेशानियाँ ,
सब तेरी मेहरबानियाँ ,
नहीं फिर भी तुझसे कोई गिला ,
कभी तो हंस के नज़र मिला ।
ऐ ज़िंदगी तूँ मुस्करा....

कभी ठोकरों ने गिरा दिया ,
तेरी बाजुओं ने उठा लिया ,
मुझे जो मिला तुझसे मिला,
कभी तो हंस के नज़र मिला ,
ऐ ज़िंदगी तूँ मुस्करा ....
तेरे जख्म बनें मेरी दवा ,
तेरे दर्द भी बन कर दुआ ,
मेरे साथ थे , मुझे गले लगा  ,
कभी तो हंस के नज़र मिला ,
ऐ ज़िंदगी तूँ मुस्करा ....
अनिल