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Monday, 26 October 2015

इस दशहरे........

एक दिन होगा तूँ निर्बल,
मस्तिष्क में होगा नहीं छल,
स्नायु तंत्र क्षीण होगा ,
दृष्टि श्रवण से हीन होगा
चल- फिर नहीं तूँ पाएगा,
अपनों को आँखों से अपनी,
पहचान नहीं तूँ पाएगा,
हाँ,उस दिन तेरी जुबां पर ,
राम नाम ही आएगा ........

हो सके तो खत्म कर दे ,
अभिमान रूपी रावण को ,
सत्य रूपी राम से ........
इस दशहरे........
अनिल कुमार सिंह