आसमां तेरे शामियाने में , इक सितारा गुमशुदा ओझल, इस कदर तलाश में उसकी, कितनें जुगनू भर लिए बाहों में, गर्म यादों की गर्म आहों से, बर्फ आंसू पिघल के बहते हैं, मेरी आँखों चिटके दर्पण में, ख्वाब कुछ सहमें हुए रहते हैं कैसे ढूंढें , कहां तलाश करें, नामालूम वो किस शहर में रहते है....
जो दृढ़ रहा, अटल रहा, जीवन आघात उसी को मिला, मरूस्थल के पहाड़ों पर थोर के जंगल होते हैं.... और होते हैं कुछ कंटक वन, विषधर भी बसेरा करते हैं, जो अटल रहा, वह अचल रहा, नहीं झुका, वह नहीं झुका जीवन संताप किसे न मिला....
इश्क़ तमाम उम्र रोया है यादों से लिपट कर,
अजीब सुलगन है आँसुओं से बुझती ही नहीं ,
भला , भूल कर भी भुला पाया है कोई हमदर्द ,
"भुला देना हमें" यूं ही कहते हैं बिछुड़ने वाले ,
जैसे जुदा होने की कोई रस्म हो शायद,
तूँ मेरी रूह में शामिल है बेखबर इस कदर ,
आईना देखता हूँ,तूँ सामने मुस्कुराती है ,
न मालूम, कोई कैसे भूल पाता है ..........
मैं उसी दर पर नमीं की तलाश करता हूँ,
यकीनन,वहीं छलके होंगे तुम्हारे आँसू,
जो छलके नहीं थे उस वक़्त ज़माने के डर से ,
फिज़ाएँ बयां करती हैं ,बिछुड़ने की दास्ताँ ,
कि,मुहब्बत अब भी वहाँ पे रोती है ,
जहां दफ़न हुये थे आंसुओं के कतरे,
हाँ, अब उस मिट्टी से मुहब्बत की ताबीज़ बनती है ...
"फिर कभी न मिलने का वादा मुक़र्रर है "