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Tuesday, 12 May 2015

अगले ही पल का ठिकाना

अगले ही पल का ठिकाना
किसे पता और किसने जाना ,
रेत के महलों पर बैठे
जिंदगी को बुनते जाना
कितनी सुन्दर
कितनी लम्बी

किसे पता और किसने जाना।

एकटक -अनथक चकोरा
चन्द्र कलाएं वो क्या जाने
चाँदनी का जो दीवाना

मूक बातें
कितनी रातें
किसे पता और किसने जाना।


स्वाति की बूंदें क्या जाने
रूप का अगला परिवर्तन
शांत होगी किसकी तृष्णा
सीपियों
या चातकों कीकिसे पता और किसने जाना ....


एक सुर में  सब हैं कहते
घाट पर शव के बाराती
है यही अंतिम ठिकाना
कौन सा दिन
कौन सा पल
किसे पता और किसने जाना.......